Wednesday 15 October 2008

गणपति बप्पा मोरिया...

प्रजातंत्र-प्रांगण में भगवन् अजब तमाशा होरिया
गणपति बप्पा मोरिया!

गांधीजी का चित्र लगाकर, जनगण धन पर डालें डाका,
जाने कब कुरसी छिन जाए, फिर कैसे जीएंगे काका
खोलेंगे अगले चुनाव में, भर लें आज तिजोरियां,
गणपति बप्पा मोरिया!

गालों पर छाईं है लाली,चेहरा दमक रहा ज्यों दर्पण,
ये सफेद डाकू हैं, हरगिरज नहीं करेंगे आत्मसमर्पण।
जितने पहरेदार बढ़ रहे, उतनी होती चोरियां
गणपति बप्पा मोरिया!

सच्चे स्वतंत्रता सेनानी, ताम्रपत्र को चाट रहे हैं,
जाली सर्टिफिकेट बनाकर, चमचे चांदी काट रहे हैं।
कूटनीति की पिचकारी से, खेल रहे हैं होरियां।
गणपति बप्पा मोरिया!

फर्स्ट क्लास ‘एम.ए’ रिजेक्टर, ले लें थर्ड क्लास बी.ए.को,
साहब नहीं छुएंगे पैसा, दो हजार दे दो पी.ए. को।
जनसेवा का लगा मुखौटा, दाग दनादन गोलियां
गणपति बप्पा मोरिया!

मार्केटिंग को जायं ‘हजूरिन’ सजकर सरकारी कारों में,
उनके दर्शन को हो जाती, भीड़ इकट्ठी बाज़ारों में,
फिल्मी हीरोइन-सी लगतीं, ये राष्ट्रीय चकोरियां
गणपति बप्पा मोरिया!

लड़के लम्बे बाल बढ़ाएं, केस कटाती हैं कन्याएं,
बेटे ब्लाउज़ पहिन रहे हैं, बिटिया जी लुंगी लटकाएं।
धोखे में पड़ जाते ‘काका’, को छोरा को छोरियां,
गणपति बप्पा मोरिया!

ईमानी अफसर को नीचेवाले बेईमान बना दें,
लालच का पेट्रोल छिड़कर कर, नैतिकता में आग लगा दें।
तू भी खा और हमें खिला, या बांध बिस्तरा-बोरियां,
गणपति बप्पा मोरिया!

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