Sunday 31 August 2008

पूंछ और मूंछ

एक के पास मूंछ थी
एक के पास पूंछ थी
मूंछ वाले को कोई
पूछता नही था
पूंछ वाले की पूछ थी |

मुछ वाले के पास
तनी हुई मूंछ का सवाल था
पूंछ वाले के पास
जुकी हुई पूंछ का जवाब था |

पूंछ की दो दिशाए नही होती है
या तो भयभीत होकर दुबकेगी
या मुहब्बत में हिलेगी
मारेगी या मरेगी
पर एक वक्त में
एक ही काम करेगी |
मूंछे क्यो अशक्त है,
क्योंकि दो दिशाओ में
विभक्त है |

एक जुकी मूंछ वाला
जुकी पूंछ वाले से बोला -
यार ,
मई ज़िन्दगी में
उठ नही प् रहा हु|

पूंछ वाला बोला-
बिल्कुल नही उठ पाओगे
कारन एक मिनुत में
समज जाओगे |
बताता हु,
तुम बिना हाथ लगाए
अपनी मूंछ उठाकर दिखाओ
मई अपनी पूंछ उठाकर दिखाता हु |
जो उठा सकता है
वही उठ सकता है,
इसीलिए पूंछ वालों की
सत्ता है |

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