Wednesday 16 July 2008

सागर खैय्यामी

रफ्ता रफ्ता हर पुलिस वाले को शायर कर दिया
महफ़िल-ऐ-शेर-ओ-सुखान में भेज कर सरकार ने
एक कैदी सुबह को फांसी लगा कर मर गया
रात भर गज़ले सुनाई उस को थानेदार ने


एक शाम किसी बज्म में जूते जो खो गए
हम ने कहा बताईये घर कैसे जायेंगे
कहने लगे के शेर सुनाते रहो यूं ही
गिनते नही बनेंगे अभी इतने आएंगे


बोला दूकानदार के क्या चाहिए तुम्हें ?
जो भी कहोगे मेरी दूकान पर वो पाओगे
मैं ने कहा के कुत्ते के खाने का 'cake' है ?
बोला यहीं पे खाओगे यां घर लेके जाओगे ?

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